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Thursday, 22 January 2015
मप्र के राज्यपाल रामनरेश यादव से पत्रकार प्रवीण श्रीवास्तव व राजकुमार सोनी की सौजन्य भेंट
Friday, 28 March 2014
अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बनेंगे
सूर्य व शुक्र बनवाएंगे मोदी को पीएम
प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने के लिए महिला शक्ति होगी मददगार
- राजकुमार सोनी
मई में गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर सत्तासीन होंगे। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने में किसी खास महिला का योगदान होगा। ऐसा योग सूर्य व शुक्र ग्रह से बन रहा है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के ज्योतिषीय आकलन दृष्टिकोण से मप्र के प्रमुख भविष्यवक्ताओं व ज्योतिषियों से अबकी बार किसकी सरकार और कौन बनेगा प्रधानमंत्री के बारे में बात की। इन प्रकांड विद्वानों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक सीटें हासिल होंगी और एनडीए की सरकार के मुखिया इस बार लालकृष्ण आडवाणी की बजाय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे। लोकसभा में एनडीए को 250 से 275 सीटें मिलेंगी जबकि यूपीए को 80 से 110 सीटें ही मिल पाएंगी।
इंदौर के लालकिताब विशेषज्ञ एवं भविष्यवक्ता पं. आशीष शुक्ला के अनुसार शनि शत्रु राशि में होकर चतुर्थ पर पूर्ण दृष्टि रखने से जनता के बीच प्रसिद्ध बना रहा है। भारत की अधिकांश जनता भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रही है। दशमेश बुध एकादशेश के साथ है। दशमेश सूर्य, केतु से भी युक्त है। सूर्य का महादशा में लग्नेश मंगल का अन्तर चल रहा है जो दशमेश होकर लाभ भाव में व मंगल स्वराशि का होकर लग्न में है। यह समय भाजपा को उत्थान की ओर लेजाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बन जाएंगे। पं. शुक्ल ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी का योग प्रधानमंत्री बनने का नहीं है।
सागर के ज्योतिषाचार्य एवं अंक शास्त्री पं. पीएन भट्ट के अनुसार नरेन्द्र मोदी की जन्म राशि वृश्चिक है। शनि की साढ़े साती का प्रथम चरण चल रहा है। राजभवन में विराजे शुक्र में पराक्रमेश शनि की अन्तर्दशा में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। 02.12.2005 को शुक्र की महादशा के बाद राज्येश सूर्य की महादशा जो 03.02.2011 तक चली। तत्पश्चात् 03.02.2011 से भाग्येश चन्द्र की महादशा का शुभारम्भ हुआ। ज्योतिष ग्रंथों में वर्णित है कि एक तो भाग्येश की महादशा जीवन में आती नहीं है और यदि आ जाए तो जातक रंक से राजा तथा राजा से महाराजा बनता है। मोदी भाग्येश की महादशा में मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बन सकते हैं, किन्तु चन्द्रमा में राहु की अन्र्तदशा ग्रहण योग बना रही है तथा 20 अप्रैल से 20 जुलाई 2014 के मध्य व्ययेश शुक्र की प्रत्यन्तर दशा कहीं प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने के प्रबल योग को ण न कर दें? यद्यपि योगनी की महादशा संकटा में सिद्धा की अन्तर्दशा तथा वर्ष कुण्डली में वर्ष लग्न जन्म लग्न का मारक भवन (द्वितीय) होते हुए भी मुंथा पराक्रम भवन में बैठी है तथा मुंथेश शनि अपनी उच्च राशि का होकर लाभ भवन में विराजमान है। जो अपनी तेजस्वीयता से जातक को 7 रेसकोर्स तक पहुंचा सकता है। किन्तु एक अवरोध फिर भी शेष है और वह है सर्वाष्टक वर्ग के राज्य भवन में लालकृष्ण आडवानी और राहुल गांधी की तुलना में कम शुभ अंक अर्थात् 27. साथ ही ''मूसल योग'' जातक को दुराग्रही बना रहा है तथा केमद्रुम योग, जो चन्द्रमा के द्वितीय और द्वादश में कोई ग्रह न होने के कारण बन रहा है। उसका फल भी शुभ कर्मों के फल प्राप्ति में बाधा। वर्तमान में भाग्येश चन्द्रमा की महादशा चल रही है, जो दिल्ली के तख्ते ताऊस पर मोदी की ताजपोशी कर तो सकती है किन्तु केमद्रुम योग तथा ग्रहण योग इसमें संशय व्यक्त करता नजर आ रहा है?
ग्वालियर के भविष्यवक्ता पं. एचसी जैन ने बताया कि नरेंद्र मोदी की कुंडली में केन्द्र का स्वामी केन्द्र में होकर त्रिकोण के साथ लक्ष्मीनारायण योग बना रहा है। यह योग कर्म क्षेत्र को धनवान बनाने में समर्थ है। यही कारण है कि नरेंद्र मोदी की ख्याति विरोध के बावजूद लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में एनडीए को 250 से 275 सीटें मिलेंगी जबकि यूपीए को 80 से 110 सीटें ही मिल पाएंगी। जैन ने बताया कि मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने में किसी खास महिला का विशेष योगदान रहेगा।
जन्मकुंडली : नरेन्द्र मोदी
जन्म दिनांक : 17 सितम्बर, 1950
जन्म समय : 11 बजे प्रात:
जन्म स्थान: मेहसाना (गुजरात)
Tuesday, 27 November 2012
अपनी उलझी समस्याओं को सुलझाएं
शक्तियों का साक्षात चमत्कार
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि कलियुग में शक्तियों का साक्षात चमत्कार देखने को मिलता है। किसी भी जातक ने थोड़ी सी भी पूजा-अर्चना कर ली उसे तुरंत लाभ मिलता है। अगर आप भी किसी भी समस्या से घिरे हैं और तत्काल निदान चाहते हैं तो शक्तियों का अद्भुत चमत्कार अनुभव कर सकते हैं। अगर आपको बाकई ढोंगी तांत्रिकों, बाबाओं, जादू-टोना वालों से बेहद तंग और परेशान हो चुके हैं तो सच्ची शक्तियों की कृपा प्राप्त कर अपनी उलझी हुई समस्याओं का निदान प्राप्त कर जीवन को खुशहाल बना सकते हैं। एक बार आपने शक्तियों की विशेष कृपा प्राप्त कर ली तो आपका जीवन धन्य हो जाएगा। हर जातक के जीवन में अनेकानेक समस्याएं आती रहती हैं उन से वह कुछ समय के लिए छुटकारा तो पा लेता है लेकिन कई समस्याएं ऐसी हैं जो जिंदगी भर जातक इनसे छुटकारा नहीं पा सकता। रोजाना का पारिवारिक कलह, पति-पत्नी में मन-मुटाव, आसपास के पड़ोसियों की द्वेष भावना, ऊपरी हवा का चक्कर, जमीन-जायदाद, कोर्ट-कचहरी, प्रेम में विफलता, तलाक की नौबत, धन की बेहद तंगी, बेरोजगार, सास-बहू में अनबन, किसी भी काम में मन नहीं लगना, बीमारियों का पीछा नहीं छूटना, शत्रुता जैसी समस्याएं हर जातक को घेरे रहती हैं। अगर आप इन सभी का सटीक निदान चाहते हैं तो एक बार जरूर संपर्क करें।
- पंडित राज
चैतन्य भविष्य जिज्ञासा शोध संस्थान
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Saturday, 12 May 2012
गुरु का वृष राशि में प्रवेश
गुरु, ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष, गुरुवार 17 मई 2012 को प्रात: 9.34 बजे रेवती नक्षत्र में शुक्र राशि वृष में प्रवेश करेंगे। गुरु इस दिन से 31 मई 2013 प्रात: 6.49 बजे तक अपने शत्रु शुक्र की राशि में ही विराजमान रहेंगे। इस दौरान 12 राशियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ेगा। आइये जानते हैं विस्तार से।
गुरु के राशि परिवर्तन को सभी उम्मीद भरी नजरों से देखते हैं। इसका कारण यह है कि गुरु नवग्रहों में ऐसा ग्रह है जो धर्म-अध्यात्म, बुद्धि-विवेक, ज्ञान, विवाह, पति, संतान, पुत्र सुख बड़े भाई का कारक माना जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुरु हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शरीर में वसा, पाचन क्रिया, कान, हृदय सहित लीवर को प्रभावित करता है।
अगर आप अविवाहित हैं और सादी करना चाहते हैं या फिर आप संतान के इच्छुक हैं तो इस दौरान आप भी गुरु को आशा भरी नजरों से देख सकते हैं। अगर आप नौकरी व्यवसाय में उन्नति की आशा रखते हैं अथवा किसी ऋण से मुकित की कोशिश कर रहे हैं तब भी गुरु के राशि परिवर्तन को उम्मीद भरी नजरों से देख सकते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन सभी विषयों में शुभ और अपेक्षित परिणाम आपको अपनी राशि के अनुरूप ही प्राप्त होंगे।
मेष : धन लाभ होगा
आपकी जन्म राशि से दूसरे घर में गुरु का गोचर होना आपके लिए सुखद होगा। गुरु के इस गोचर के प्रभाव से धन का लाभ होगा। यह आपके आत्मविश्वास को भी बढ़ाएगा तथा आप व्यवहार में भी बदलाव महसूस करेंगे। आप अगर विवाह के योग्य हैं तो आपकी शादी हो सकती है, संतान के इच्छुक हैं तो आपकी इच्छा पूरी होगी। छात्रों को शिक्षा में शुभ परिणाम प्राप्त होंगे।
वृषभ : आत्म विश्वास बढ़ाएगा
गुरु का गोचर प्रथम भाव में होने के कारण आपको उन बातों से बचना चाहिए जिससे सम्मान की हानि हो सकती है। गुरु का यह गोचर कार्य क्षेत्र में अनचाहे स्थान पर स्थानांतरण करवा सकता है। कार्यों में संतुष्टि की कमी रह सकती है। आपके कार्य विलंब से पूरे होंगे तथा आपके कार्य को कम सराहा जा सकता है। इसके अलावा मेहनत के बावजूद सफलता नहीं मिलने से मन असंतुष्ट रह सकता है।
मिथुन : मन असंतुष्ट रहेगा
बारहवें घर में गुरु का गोचर अशुभ कहलाता है। गुरु के इस गोचर के प्रभाव के कारण आपके घर में कई मांगलिक कार्य होंगे जिससे आपके व्यय बढ़ेंगे। इससे आपको आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। मित्रों द्वारा लगाये गये आरोप से मन दु:खी रह सकता है। परिवार में जीवन साथी एवं संतान से मतभेद हो सकता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय कष्टदायी रह सकता है जिससे कोई पुराना रोग उभर सकता है।
कर्क : आर्थिक स्थिति में सुधार होगा
कर्क राशि में आपका जन्म हुआ है तो गुरु का यह गोचर आपके लिए अत्यंत शुभ फलदायी रहेगा। इसका कारण यह है कि गुरु का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में हो रहा है। इस गोचरीय स्थिति के कारण आपको धन का लाभ मिलेगा जिससे आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार होगा। सुख-सुविधाओं एवं मान-सम्मान में बी बढ़ोत्तरी होगी। मित्रों से भी लाभ की अच्छी संभावना रहेगी। अगर इन दिनों आपकी शादी की बात चल रही है तो आपका विवाह हो सकता है। अगर आप विवाहित हैं और संतान प्राप्ति की कामना रखते हैं तो आपकी मुराद पूरी हो सकती है।
सिंह : संघर्षमय समय व्यतीत होगा
गुरु की इस गोचरीय अवधि में आपको धैर्य एवं समझदारी से चलने का प्रयास करना होगा क्योंकि आपके लिए यह समय संषर्घमय रह सकता है। आपके लिए उचित होगा कि अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और सभी को आदर दें। इससे आपका मान-सम्मान बना रहेगा। आर्थिक परेशानियां भी इन दिनों सिर उठा सकती हैं। अत: नए निवेश सोच समझकर करें। नई योजना पर कार्य शुरू करने की सोच रहे हैं तो अभी उसे टाल देना उचित रहेगा क्योंकि, इस विषय में भी यह समय गुरु का आपकी जन्म राशि से दसवें घर में होना शुभ प्रतीत नहीं होता है।
कन्या : मन की इच्छाएं पूर्ण होंगी
आपके लिए गुरु का वृष राशि में गोचर करना शुभ फलदायी रहेगा। गुरु की इस गोचरीय स्थिति के कारण भाग्य में वृद्धि होगी। धर्म एवं आध्यात्मिक दृष्टि से समय उत्तम रहेगा जिससे घर में धार्मिक कार्य सम्पन्न होंगे। भाई एवं संतान पक्ष से सहयोग प्राप्त होगा। आप अपने प्रयासों से मन की कुछ इच्छाओं को पूर्ण कर सकते हैं। बीते दिनों जिन समस्याओं से आप परेशान थे उनमें कमी महसूस कर सकते हैं।
तुला : वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें
आपको अपनी वाणी के साथ ही साथ क्रोध पर भी नियंत्रण रखना होगा। अन्यथा घर-परिवार में जहां मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ सकता है, वहीं कार्यक्षेत्र में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मान-सम्मान की हानि की संभावना होने के कारण भी आपके लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। गुरु का गोचर आपकी जन्म राशि से आठवें घर में होने से यह आपके स्वास्थ्य के लिए कष्टकारी रह सकता है। ऐसे में आपके लिए उचित होगा कि अपनी सेहत का ध्यान रखें तथा अनावश्यक भाग-दौड़ से बचें।
वृश्चिक : कामयाबी का रास्ता खुलेगा
गुरु का गोचर आपकी जन्म राशि से सातवें घर में हो रहा है। यह आपके लिए बहुत अच्छी स्थिति है। इस गोचर के कारण आजीविका के क्षेत्र में सभी प्रकार की परेशानियां धीरे-धीरे कम होती जाएंगी और कामयाबी का रास्ता खुलेगा। आर्थिक परेशानियां भी दूर होंगी और आपने किसी से लोन लिया है तो उसे चुका देंगे। पारिवारिक समस्याएं भी बातचीत व समझदारी से सुलझ सकती हैं। अत: प्रयास कीजिए। विवाह के इच्छुक हैं और घर में विवाह संबंधी बातचीत चल रही है तो इस अवधि में आपकी शादी होने की संभावना भी प्रबल है। सगे-संबंधियों से सहयोग प्राप्त होगा।
धनु : स्वास्थ्य पर ध्यान दें
इस अवधि में आपके लिए धैर्य एवं परिश्रम से कार्य करना उचित होगा क्योंकि गुरु का गोचर आपकी राशि से छठे घर में हो रहा है। इस गोचर के प्रभाव के कारण आपको स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना कना पड़ सकता है, विशेष तौर पर पेट संबंधी रोग आपके लिए परेशानी का कारण बन सकते हैं। आप अगर किसी प्रतियोगिता परीक्षा में सम्मिलित हो रहे हैं तो काफी मेहनत करनी होगी अन्यथा सफलता कठिन होगी। दाम्पत्य जीवन में भी समस्याएं उत्पन्न होंगी।
मकर : शुभ फल मिलेगा
आपके लिए गुरु का गोचर जन्म राशि से पांचवे घर में होना शुभ फलदायी रहेगा। गुरु के इस गोचरीय प्रभाव के कारण आपको भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा। कई प्रकार की उलझनों को सुलझाने में सफल होंगे। नौकरी एवं व्यवसाय में लाभ की अच्छी संभावना रहेगी। कई नए कार्य भी इस अवधि में पूरे होंगे। आप चाहें तो इस समय निवेश भी कर सकते हैं। विवाह एवं संतान प्राप्ति के लिए भी गुरु का वृषभ राशि में गोचर शुभ रहेगा।
कुंभ : नौकरी-व्यवसाय में बदलाव होगा
वृष राशि में गुरु का गोचर होने से आपको कई प्रकार की परेशानियों से राहत मिलेगी, परन्तु मानसिक चिंताएं बढ़ेगी। इस दौरान आप स्थान परिवर्तन कर सकते हैं अथवा नौकरी एवं व्यवसाय में बदलाव कर सकते हैं। कार्य-क्षेत्र में सहकर्मियों से विवाद हो सकता है। इसी प्रकार भाई-बंधुओं से भी मतभेद की स्थिति रह सकती है। आपकी मां को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। आप चिकित्सक से परामर्श जरूर ले लें।
मीन : मतभेद उभर सकते हैं
गुरु का गोचर इस समय आपकी जन्म राशि से तीसरे घर में होगा जिससे भाई-बहनों से मतभेद हो सकता है। सगे-संबंधियों से भी किसी बात को लेकर मतांतर रह सकता है। इन दिनों आप शारीरिक थकान महसूस कर सकते हैं। आर्थिक स्थिति में अनुकूलता बनाये रखने के लिए तथा मान-सम्मान प्राप्ति के लिए अपने कार्य-व्यवसाय पर मनोयोग से ध्यान देना होगा। आपके लिए सलाह है कि गुरु के इस गोचर की अवधि में लंबी यात्राओं से बचें।
जातक क्या करें
इस अवधि में गुरु का शनि से षडाष्टक संबंध बन रहा है, जो अशुभ फलदायक माना जा रहा है। इस स्थिति में गुरु के अशुभ प्रभाव से बचाव के लिए भगवान विष्णु की पूजा करें। गुरु का व्रत, गुरु के मंत्र ऊं बृहस्पतये नम: का जप करें। मंदिर में पीले फूल, बेसन के लड्डू आदि अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। श्री सूक्त व लक्ष्मी सूक्त का पाठ धन लाभ के लिए विशेष लाभकारी रहेगा।
- अरुण बसंल
फ्यूचर समाचार सेवा
Friday, 11 May 2012
राजकुमार सोनी की कविताएं
(1)
इंसानियत
जो बुरे कर्म करे,
उसे शैतान कहते हैं।
जो इंसानियत को डसे,
उसे हैवान कहते हैं।
जो इन दुर्गुणों को छोड़कर,
सन्मार्ग अपनाये,
सचमुच उसे इंसान तो क्या
भगवान कहते हैं।
जिन्दगी का दूसरा नाम,
जिन्दादिली है।
फूल की रक्षा न
कर पाना बुझदिली है।
प्यार की चिता पर ...,
स्वयं को भस्म कर डाले।
वही तो सच्ची मोहब्बत
की संग दिली है।
(2)
जिन्दगी का सफर
जिन्दगी का सफर बड़ा है।
पर जख्म दिल का पुराना है।।
वे खौफ तूफानों से डरता नहीं।
यही तो हमें आजमाना है।।
हम लुटे, भीड़ में- बाजार में।
क्योंकि दिल का हिसाब चुकाना है।।
अब न फेंको फूल मुझ पे जरा।
फिर लौटूंगा वीरान चमन में।।
अभी तो मुझे बहार लाना है।।
(तीन)
जिन्दगी तो बेवफा है
जिन्दगी का ये घट,
बूंद-बूंद से भरता है।
कदम-कदम पै वे हिसाब,
राहों में बिखरता है।
जिन्दगी तो बेवफा है,
तभी तो उम्र घट रही है।
मगर राही की नजरें,
मंजिलों पर टिक रही हैं।
हो सके आरजू दिल में,
हम यही पालते रहें।
कर लें आज हम प्यार,
घड़ी यही निकालते रहें।।
(चार)
औरों के दु:ख सहूं
क्या कुछ मैंने खोया है
क्या अब मैं कुछ पाऊंगा
आया था काली हाथ
खाली हाथ ही जाऊंगा
कुछ कर गुजरूं मैं
सोचता हूं मैं क्या करूं
किसी को अपने सुख देकर
औरों के दु:ख सहूं।
आंसू नहीं हैं आंख में
बहाना जरूर है...।
मुझे औरों के दु:ख
सहने में ही खुद पर गुरूर है।।
वो मुस्कराते रहें
मैं उम्र भर रोता रहूं।
मरूं तो में बस....।
दु:खों की सेजों पर ही
सुख एक अनुभूति है
क्षण भर का विश्राम
दु:ख एक जीवन है।
वही है जीवन संग्राम।।
(पांच)
हम पतझड़ में बहार लाते हैं
हम वो हैं
जो .....
पतझड़ में
बहार लाते हैं।
गम में....
आंसू नहीं बहाते
बल्कि
और मुस्कराते हैं।।
सोचता हूं
क्या
लेकर
हम आये थे।
और
क्या लेकर जाएंगे
भाई-बहन
रिश्ते-नाते,
धन-दौलत
सभी
यहीं रह जाएंगे।
ये गम क्या है
इस शरीर का वो
नम हिस्सा है,
जो घड़ी-घड़ी रोता है
और घड़ी-घड़ी हंसता है।
फिर जिन्दगी को क्यों न
गम में ही खुश रखूं,
गम ही जीवन का सार है
क्यों न औरों से मैं कहूं।।
(छह)
अंधकार मिटाओ
दीपक के अंतर्मन से
एक सवाल उठा
बाती...
ने लौ से पूछा
क्या होते रहेंगे
देश में- विश्व में
अत्याचार...?
अनाचार...?
दुराचार....?
विश्वासघात...?
भ्रष्टाचार...?
कब पैदा होगा
इनको मिटाने वाला।
इंतजार है हमें
उनके अवतरण का।।
प्रयुत्तर में-
लौ मुस्कुराई
बोली .....
श्री की स्थापना
पहले हो चुकी है।
लेकिन
अंधकार
की दीवार
इस कदर
फैली है ......
कि तुम को ही काम
करना है,
अंधकार मिटाकर
उद्धरण बनना है।
तुम्हीं हो रोशनी
के दाता....।
तुम्हीं हो देश के
भाग्य विधाता।।
(सात)
अनगिनत दीप जल गए
अंधकार
चारों तरफ अंधकार।
मच रहा हा ... हा ..कार।
छल, प्रपंच, अत्याचार
क्या यही है
समय के उपहार
नहीं....?
कभी
नहीं ....?
अचानक
प्रकृति के दर्पण में
एक चिंगारी छूटी
अनायास
रोशनी फैलती चली गयी।
दूर हुआ अंधेरा
ज्यों प्रकट हुआ
रात में सबेरा।
तब कुहासों के बादल
छट गए।
जब अनगिनत
दीप जल गए।।
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सीए का शानदार भविष्य
आजकल चार्टर्ड अकाउंटेंट का रुतबा पूरी दुनिया में धाक जमा रहा है। बिना सीए के कोई भी कंपनी तरक्की नहीं कर सकती। आप अपना भविष्य इसमें संवार सकते हैं।
किसी भी व्यावसायिक संगठन में आर्थिक या वित्तीय प्रबंधन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अभाव में संगठन के कार्यों का उचित प्रबंधन तो दूर, ठीक तरह से इसका चल पाना भी कठिन है। कंपनियों में आर्थिक प्रबंधन की यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी चार्टर्ड अकाउंटेंट निभाता है। वह कंपनी के आर्थिक क्रिया कलापों से जुड़े सभी मामलों में, जैसे टैक्स से संबंधित मामलों, बही खातों के मेंटिनेंस एवं उनके ऑडिट एवं वित्तीय नियम कानूनों के प्रति सहज रहकर अपनी इस जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। सीधे शब्दों में कहें तो चार्टर्ड अकाउंटेंसी एक आकर्षक आय वाला प्रभावशाली पेशा है, जिसमें अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, टेक्सेशन, कार्पोरेट फाइनेंस, कार्पोरेट लॉ, प्रोजेक्ट मूल्यांकन इत्यादि सम्मिलित हैं। संपूर्ण विश्व में बढ़ती कॉर्पोरेट गतिविधियों को देखते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की माँग बहुत बढ़ गई है। भारत में कई मल्टीनेशनल कंपनियों के आ जाने से सीए प्रोफेशनलों के तो वारे न्योर हो गए हैं।
मेहनत का सुफल
न केवल वाणिज्य संकाय वाले विद्यार्थी अपितु अन्य संकाय वाले प्रतिभाशाली एवं मेहनती विद्यार्थी भी सी.ए. बन सकते सकते हैं। सीए बनने के तीन चरण हैं। कॉमन प्रोफीसिएंसी टेस्ट (सीपीटी), इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल सर्टिफिकेट कोर्स (आइपीसीसी) और फायनल। सीए में कॅरियर बनाने के इच्छुक युवाओं की गणित विषय पर बहुत अच्छी पकड़ होनी आवश्यक है। उसमें निर्णय लेने की अभूतपूर्व क्षमता, रीजनिंग में निपुणता, विश्लेषण की क्षमता, पूर्वानुमान लगाने की कला व क्लाइंट व कर्मचारियों के साथ डील करने के गुण भी होने चाहिए।
देश में संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत 1949 में द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की स्थापना की गई। सीए एक सर्टिफिकेट कोर्स है जो आईसीएआई द्वारा कराया जाता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई करने वाले छात्रों को इसी संस्थान में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। हाल ही में सीए का नया पाठ्यक्रम लागू किया गया है। इसमें सीए के पाठ्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि न केवल छात्र इस कोर्स को पूरा कर एक विश्व स्तरीय फाइनेंस प्रोफेशनल बन सकें, बल्कि कोर्स की समयावधि में भी कमी लाने का सार्थक प्रयास किया गया है। सीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के बाद पूरा पाठ्यक्रम चार वर्षों में पूरा किया जा सकता है। सीए के नए पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को थ्योरी के साथ आवश्यक प्रेक्टिकल ट्रेनिंग का भी प्रावधान है।
दसवीं के बाद बनाएं कैरियर
सीए बनाने हेतु दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (सीपीटी) के लिए आईसीएआई के बोर्ड ऑफ स्टडीज में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके साथ-साथ अपनी स्कूली शिक्षा भी जारी रखनी होती है। इसके बाद सीपीटी परीक्षा में शामिल हुआ जा सकता है। गौरतलब है कि सीपीटी परीक्षा कोई बहुत कठिन परीक्षा नहीं है। नवंबर 2011 में आयोजित सीपीटी परीक्षा के परिणाम 18 जनवरी, 2012 को जारी किए गए हैं। इन परिणामों के तहत इस परीक्षा में बैठे कुल छात्रों में से लगभग 35 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। 12वीं और सीपीटी उत्तीर्ण करने के बाद साढ़़े तीन वर्ष की प्रैँटिकल ट्रेनिंग, इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल सर्टिफिकेट कोर्स (आईपीसीसी) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग कोर्स में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। सौ घंटे की इफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद आप आईपीसीसी की प्रवेश परीक्षा के हकदार हो जाएँगे। इसके साथ ही आईपीसीसी में प्रवेश हेतु 18 महीने की प्रेक्टिकल ट्रेनिंग भी आवश्यक है। इसके बाद आपको जनरल मैनेजमेंट एंड कम्युनिकेशन स्किल कोर्स में दाखिला लेना होगा। आईपीसीसी में तीन पेपर्स के दो ग्रुप होते हैं। इसे उत्तीर्ण करने और साढ़़े तीन साल की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी करने के बाद आप फायनल परीक्षा में प्रवेश के अधिकारी हो जाएँगे। फायनल परीक्षा में चार-चार पेपर्स के दो ग्रुप होते हैं। इनमें सफलता हासिल करने और आईसीएआई में मेंबर के रूप में रजिस्ट्रेशन करा लेने के उपरांत आप सीए के रूप में कार्य करने के अधिकारी बन जाएँगे। चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के इच्छुक वे युवा जो स्नातक करने के उपरांत चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं, उनके लिए द इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने हाल ही में यह निर्णय लिया है कि वे स्नातक के उपरांत आईपीसीसी हेतु रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। अभी तक कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट यानी सीपीटी के बाद ही आईपीसीसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता था, लेकिन अब कॉमर्स व अन्य विषय समूह के स्नातक छात्र बिना सीपीटी दिए भी आईपीसीसी हेतु रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए कॉमर्स स्नातक को 55 प्रतिशत तथा अन्य विषयों से स्नातक को स्नातक परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होंगे।
पावर, प्रतिष्ठा और कमाई
ऐसे छात्र जिनकी अकाउंट्स एवं ऑडिट कार्यों में रुचि हो, इस क्षेत्र में एक सफल कॅरियर बना सकते हैं। यूँ तो चार्टर्ड अकाउंटेंट पद के साथ जुड़े पॉवर, प्रतिष्ठा और कमाई की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए पहले से ही बड़ी संख्या में युवा इसे अपना कॅरियर बनाने की कामना रखते हैं, परंतु वैश्वीकरण के कारण विगत कुछ वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में आए मूलभूत परिवर्तनों के कारण इस कॅरियर की लोकप्रियता आज आकाश को छू रही है। समय के साथ सीए के कार्यक्षेत्र में भी वृद्धि हुई है। आज किसी भी कंपनी में सीए को सम्पूर्ण बिजनेस प्रोवाइडर के तौर पर देखा जाने लगा है, अर्थात ऐसा व्यक्ति जो बिजनेस से संबंधित सभी समस्याओं का निपटारा करने में सक्षम हो। इतना ही नहीं आईसीएआई द्वारा छात्रों को आकर्षित करने के लिए सीए के पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों के कारण भी ऐसा हो रहा है।
रोजगार के अवसर
एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए रोजगार के अवसरों की कोई कमी नहीं है। इस क्षेत्र में रोजगार की कितनी संभावनाएँ हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल भारत में ही 80 हजार से भी ज्यादा सीए की माँग है। विभिन्न देशों में 25 हजार से भी ज्यादा भारतीय सीए की माँग है। सीए का पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर रोजगार के कई विकल्प खुल जाते हैं। कई सरकारी एवं निजी संस्थानों में सीए की नियुक्तियाँ जोर-शोर से होती हैं। सीए कोर्स के उपरांत वित्तीय नियंत्रक, वित्तीय मैनेजर, आईटी कंसल्टेंट, टेक्स कंसल्टेंट, आदि पदों पर रोजगार की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। एक बेहतर मैनेजमेंट सलाहकार बनकर आप मनचाही आय प्राप्त् कर सकते हैं। बाजार अनुसंधान, बजट बनाना, कार्पोरेट प्लानिंग, आर्गेनाइजेशन डेवलपमेंट, सिस्टम एनालिसिस, कार्यशील पूँजी निर्माण, पूँजी मामलों के सलाहकार, सिक्योरिटीज व निवेश सम्बन्धी सलाहकार इत्यादि क्षेत्रों में भी सीए काम करते हैं। सीए कोर्स करने के उपरांत आप सरकारी संस्थानों के अतिरिक्त प्रायवेट एवं कॉर्पोरेट सेक्टर में भी बड़ी आसानी से नौकरी प्राप्त् कर सकते हैं। आईसीएआई ने अब देश के विभिन्न शहरों में कैम्पस प्लेसमेंट की भी व्यवस्था की है। वैसे सीए की पढ़़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए नौकरी करना कोई बाध्यता नहीं है। आधिकारिक रूप से सीए बनने के बाद स्वतंत्र प्रैक्टिस की शुरुआत भी की जा सकती है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया का हेड ऑफिस एवं मध्यप्रदेश में इसकी शाखाएँ जहाँ से इस कोर्स हेतु रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है, इस प्रकार हैं-
हेड ऑफिस
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, आईसीएआई भवन, इंद्रप्रस्थ मार्ग, नई दिल्ली।
मध्यप्रदेश में ब्राँच
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, इंदौर ब्राँच -101, सिक्का स्कूल के पास स्कीम नं. 74, इंदौर।
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, भोपाल ब्राँच-148, जोन-2, महाराणा प्रताप नगर, भोपाल।
बाजार की नब्ज पकडिय़े
अगर आप बाजार की नब्ज पकडऩा अच्छी तरह जानते हैं तो कैरियर में बेहतर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आइये जानते हैं क्या- क्या है बाजार में।
मार्केट रिसर्च (बाजार अनुसंधान)एक प्रकार की मार्केटिंग तकनीक है जिसमें सर्वेक्षण, विश्लेषण और उपभोक्ताओं से बातचीत कर नए उत्पाद के बारे में अहम जानकारी प्राप्त की जाती है। मार्केट रिसर्च को हम इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि कोई कंपनी अपना नया उत्पाद बाजार में लाने से पहले रणनीति बनाती है कि बाजार में उस उत्पाद की माँग कैसे उत्पन्न की जाए ? कंपनी इस बात पर भी गौर करती है कि उसके उत्पाद का उपभोक्ता वर्ग कौन होगा, महिला, पुरुष अथवा बच्चे। माना कि कोई कंपनी साबुन मार्केट में लाना चाहती है तो कंपनी बाजार विश्लेषण करती है कि वह फेस सोप होना चाहिए या बॉडी सोप। बाजार और उपभोक्ताओं से जुड़ी तमाम जानकारियाँ, उपभोक्ताओं की पसंद-नापसंद के बारे में जानकारी एकत्रित की जाती है। इसके बाद ही उत्पाद बाजार में उतारा जाता है।
नए प्रोडक्ट को पहचानिये
मार्केट रिसर्च के अंतर्गत किसी नए प्रोडक्ट या सर्विसेज को बाजार में फैलाने के लिए सबसे पहले विस्तृत आँकड़े या डाटा इक_ा करने की जरूरत पड़ती है जिसे अंजाम देते हैं मार्केट रिसर्चर। मार्केट रिसर्चर का कार्य यह निर्धारित करना होता है कि कोई भी नया प्रोडक्ट या सर्विस बाजार में किस प्रकार खपेगा, इसका खरीददार कौन होगा। ये न सिर्फ नए प्रोडक्ट और सर्विसेज पर काम करते हैं बल्कि बाजार की रणनीतियों पर भी काम करते हैं। ये सर्वेक्षण, वैचारिक मत, सवाल-जवाब से एकत्रित हुए डाटा को डिजाइन करने के लिए सांख्यिकीय तकनीकें अपनाते हैं।
उपभोक्त की पसंद
मार्केट रिसर्चर उपभोक्ता की पसंद, खरीददारी की आदत, बाजार में उस प्रोडक्ट की कीमत और बिक्री के आधार पर डाटा एकत्रित कर उसका विश्लेषणात्मक अध्ययन करते हैं। इसके लिए उन्हें रिपोर्ट, ग्राफिक इलस्ट्रेशन जैसे टेबल, चार्ट्स आदि तैयार करने पड़ते हैं ताकि उसे प्रजेंटेशन के जरिए समझाया जा सके। इसके अलावा मार्केट रिसर्चर इस बात पर भी नजर रखता है कि कौनसे क्षेत्र में प्रोडक्ट की माँग अधिक है और उपभोक्ताओं की प्रोडक्ट के प्रति अपेक्षाएँ क्या हैं ?
मार्केट रिसर्च में तीन प्रमुख क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो इस प्रकार हैं- 1. रिसर्च, 2. फील्ड वर्क तथा 3. डाटा विश्लेषण।
रिसर्च
इस विभाग का काम बाजार से जुड़ी समस्याओं का पता लगाना और डाटा को इक_ा करना होता है। साथ ही यह भी पता लगाना कि कितने लोग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिसर्च रिपोर्ट्स और प्रस्ताव बनाने का काम भी इसी विभाग के अंतर्गत आता है।
फील्ड वर्क
फील्ड वर्क के तहत फोन, मेल के जरिए अथवा घर-घर जाकर, मार्केट सर्वेक्षण किया जाता है।
डाटा विश्लेषण
डाटा विश्लेषण के तहत इक_ा की गई सामग्री का विश्लेषण कर परिणाम तक पहुँचा जाता है।
कीजिए विश्लेषण
यदि आपमें विश्लेषण करने की क्षमता, सांख्यिकीय योग्यता, दबाव में काम करने की क्षमता, आत्मविश्वास, क्लाइंट्स से बात करने में सहनशीलता, समय प्रबंधन, आर्थिक और कला की परख हो तो इस क्षेत्र में आपके लिए दरवाजे खुले हैं। मार्केट रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने हेतु जो शैक्षणिक योग्यता आवश्यक है वह इस प्रकार है- जो बतौर रिसर्च एक्जीँयूटिव काम करना चाहते हैं उन्हें मार्केटिंग में एमबीए होना जरूरी है। इसके अलावा सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी या एन्थ्रोपोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं हेतु भी इस क्षेत्र में उजले अवसर हैं। वे युवा जो फील्ड वर्क करना चाहते हैं उनके पास सांख्यिकी, भूगोल, अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान या कम्प्यूटर साइंस में डिग्री के साथ ही अच्छी कम्युनिकेशन स्किल भी होनी चाहिए।
रोजगार के अवसर
इस क्षेत्र में रोजगार की बात की जाए तो कंपनियों, शिक्षण संस्थानों, यहाँ तक कि सरकार को भी मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है, इसलिए इस क्षेत्र में उजली संभावनाएँ हैं। मल्टीनेशनल और मार्केटिंग संगठन, सरकारी विभाग और रिसर्च इंस्टीट्यूशन इन-हाउस मार्केट रिसर्च ऑपरेशन का काम करते हैं जिसके लिए मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है। सरकारी विभागों को भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोगों की राय जानने हेतु मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए इस क्षेत्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है।
प्रमुख संस्थान
डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा।
टाइम्स स्कूल ऑफ मार्केटिंग, नई दिल्ली।
नरसी मोन्जी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज,विले पार्ले, मुंबई।
मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, अहमदाबाद।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन,जेएनयू कैम्पस, नई दिल्ली।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सेल्स, नई दिल्ली।
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