Wednesday, 29 February 2012

सीए का शानदार भविष्य





आजकल चार्टर्ड अकाउंटेंट का रुतबा पूरी दुनिया में धाक जमा रहा है। बिना सीए के कोई भी कंपनी तरक्की नहीं कर सकती। आप अपना भविष्य इसमें संवार सकते हैं।

किसी भी व्यावसायिक संगठन में आर्थिक या वित्तीय प्रबंधन की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अभाव में संगठन के कार्यों का उचित प्रबंधन तो दूर, ठीक तरह से इसका चल पाना भी कठिन है। कंपनियों में आर्थिक प्रबंधन की यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी चार्टर्ड अकाउंटेंट निभाता है। वह कंपनी के आर्थिक क्रिया कलापों से जुड़े सभी मामलों में, जैसे टैक्स से संबंधित मामलों, बही खातों के मेंटिनेंस एवं उनके ऑडिट एवं वित्तीय नियम कानूनों के प्रति सहज रहकर अपनी इस जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। सीधे शब्दों में कहें तो चार्टर्ड अकाउंटेंसी एक आकर्षक आय वाला प्रभावशाली पेशा है, जिसमें अकाउंटिंग, ऑडिटिंग, टेक्सेशन, कार्पोरेट फाइनेंस, कार्पोरेट लॉ, प्रोजेक्ट मूल्यांकन इत्यादि सम्मिलित हैं। संपूर्ण विश्व में बढ़ती कॉर्पोरेट गतिविधियों को देखते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) की माँग बहुत बढ़ गई है। भारत में कई मल्टीनेशनल कंपनियों के आ जाने से सीए प्रोफेशनलों के तो वारे न्योर हो गए हैं।

मेहनत का सुफल
न केवल वाणिज्य संकाय वाले विद्यार्थी अपितु अन्य संकाय वाले प्रतिभाशाली एवं मेहनती विद्यार्थी भी सी.ए. बन सकते सकते हैं। सीए बनने के तीन चरण हैं। कॉमन प्रोफीसिएंसी टेस्ट (सीपीटी), इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल सर्टिफिकेट कोर्स (आइपीसीसी) और फायनल। सीए में कॅरियर बनाने के इच्छुक युवाओं की गणित विषय पर बहुत अच्छी पकड़ होनी आवश्यक है। उसमें निर्णय लेने की अभूतपूर्व क्षमता, रीजनिंग में निपुणता, विश्लेषण की क्षमता, पूर्वानुमान लगाने की कला व क्लाइंट व कर्मचारियों के साथ डील करने के गुण भी होने चाहिए।
देश में संसद द्वारा बनाए गए कानून के तहत 1949 में द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की स्थापना की गई। सीए एक सर्टिफिकेट कोर्स है जो आईसीएआई द्वारा कराया जाता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट की पढ़ाई करने वाले छात्रों को इसी संस्थान में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। हाल ही में सीए का नया पाठ्यक्रम लागू किया गया है। इसमें सीए के पाठ्यक्रम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि न केवल छात्र इस कोर्स को पूरा कर एक विश्व स्तरीय फाइनेंस प्रोफेशनल बन सकें, बल्कि कोर्स की समयावधि में भी कमी लाने का सार्थक प्रयास किया गया है। सीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के बाद पूरा पाठ्यक्रम चार वर्षों में पूरा किया जा सकता है। सीए के नए पाठ्यक्रम के तहत छात्रों को थ्योरी के साथ आवश्यक प्रेक्टिकल ट्रेनिंग का भी प्रावधान है।
दसवीं के बाद बनाएं कैरियर
सीए बनाने हेतु दसवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट (सीपीटी) के लिए आईसीएआई के बोर्ड ऑफ स्टडीज में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके साथ-साथ अपनी स्कूली शिक्षा भी जारी रखनी होती है। इसके बाद सीपीटी परीक्षा में शामिल हुआ जा सकता है। गौरतलब है कि सीपीटी परीक्षा कोई बहुत कठिन परीक्षा नहीं है। नवंबर 2011 में आयोजित सीपीटी परीक्षा के परिणाम 18 जनवरी, 2012 को जारी किए गए हैं। इन परिणामों के तहत इस परीक्षा में बैठे कुल छात्रों में से लगभग 35 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। 12वीं और सीपीटी उत्तीर्ण करने के बाद साढ़़े तीन वर्ष की प्रैँटिकल ट्रेनिंग, इंटीग्रेटेड प्रोफेशनल सर्टिफिकेट कोर्स (आईपीसीसी) और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग कोर्स में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। सौ घंटे की इफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद आप आईपीसीसी की प्रवेश परीक्षा के हकदार हो जाएँगे। इसके साथ ही आईपीसीसी में प्रवेश हेतु 18 महीने की प्रेक्टिकल ट्रेनिंग भी आवश्यक है। इसके बाद आपको जनरल मैनेजमेंट एंड कम्युनिकेशन स्किल कोर्स में दाखिला लेना होगा। आईपीसीसी में तीन पेपर्स के दो ग्रुप होते हैं। इसे उत्तीर्ण करने और साढ़़े तीन साल की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी करने के बाद आप फायनल परीक्षा में प्रवेश के अधिकारी हो जाएँगे। फायनल परीक्षा में चार-चार पेपर्स के दो ग्रुप होते हैं। इनमें सफलता हासिल करने और आईसीएआई में मेंबर के रूप में रजिस्ट्रेशन करा लेने के उपरांत आप सीए के रूप में कार्य करने के अधिकारी बन जाएँगे। चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के इच्छुक वे युवा जो स्नातक करने के उपरांत चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना चाहते हैं, उनके लिए द इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने हाल ही में यह निर्णय लिया है कि वे स्नातक के उपरांत आईपीसीसी हेतु रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। अभी तक कॉमन प्रोफिशिएंसी टेस्ट यानी सीपीटी के बाद ही आईपीसीसी के लिए रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता था, लेकिन अब कॉमर्स व अन्य विषय समूह के स्नातक छात्र बिना सीपीटी दिए भी आईपीसीसी हेतु रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। इसके लिए कॉमर्स स्नातक को 55 प्रतिशत तथा अन्य विषयों से स्नातक को स्नातक परीक्षा में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक लाना जरूरी होंगे।

पावर, प्रतिष्ठा और कमाई
ऐसे छात्र जिनकी अकाउंट्स एवं ऑडिट कार्यों में रुचि हो, इस क्षेत्र में एक सफल कॅरियर बना सकते हैं। यूँ तो चार्टर्ड अकाउंटेंट पद के साथ जुड़े पॉवर, प्रतिष्ठा और कमाई की अच्छी संभावनाओं को देखते हुए पहले से ही बड़ी संख्या में युवा इसे अपना कॅरियर बनाने की कामना रखते हैं, परंतु वैश्वीकरण के कारण विगत कुछ वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था में आए मूलभूत परिवर्तनों के कारण इस कॅरियर की लोकप्रियता आज आकाश को छू रही है। समय के साथ सीए के कार्यक्षेत्र में भी वृद्धि हुई है। आज किसी भी कंपनी में सीए को सम्पूर्ण बिजनेस प्रोवाइडर के तौर पर देखा जाने लगा है, अर्थात ऐसा व्यक्ति जो बिजनेस से संबंधित सभी समस्याओं का निपटारा करने में सक्षम हो। इतना ही नहीं आईसीएआई द्वारा छात्रों को आकर्षित करने के लिए सीए के पाठ्यक्रम में किए गए बदलावों के कारण भी ऐसा हो रहा है।

रोजगार के अवसर
एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के लिए रोजगार के अवसरों की कोई कमी नहीं है। इस क्षेत्र में रोजगार की कितनी संभावनाएँ हैं इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल भारत में ही 80 हजार से भी ज्यादा सीए की माँग है। विभिन्न देशों में 25 हजार से भी ज्यादा भारतीय सीए की माँग है। सीए का पाठ्यक्रम पूर्ण करने पर रोजगार के कई विकल्प खुल जाते हैं। कई सरकारी एवं निजी संस्थानों में सीए की नियुक्तियाँ जोर-शोर से होती हैं। सीए कोर्स के उपरांत वित्तीय नियंत्रक, वित्तीय मैनेजर, आईटी कंसल्टेंट, टेक्स कंसल्टेंट, आदि पदों पर रोजगार की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं। एक बेहतर मैनेजमेंट सलाहकार बनकर आप मनचाही आय प्राप्त् कर सकते हैं। बाजार अनुसंधान, बजट बनाना, कार्पोरेट प्लानिंग, आर्गेनाइजेशन डेवलपमेंट, सिस्टम एनालिसिस, कार्यशील पूँजी निर्माण, पूँजी मामलों के सलाहकार, सिक्योरिटीज व निवेश सम्बन्धी सलाहकार इत्यादि क्षेत्रों में भी सीए काम करते हैं। सीए कोर्स करने के उपरांत आप सरकारी संस्थानों के अतिरिक्त प्रायवेट एवं कॉर्पोरेट सेक्टर में भी बड़ी आसानी से नौकरी प्राप्त् कर सकते हैं। आईसीएआई ने अब देश के विभिन्न शहरों में कैम्पस प्लेसमेंट की भी व्यवस्था की है। वैसे सीए की पढ़़ाई पूरी करने वाले छात्रों के लिए नौकरी करना कोई बाध्यता नहीं है। आधिकारिक रूप से सीए बनने के बाद स्वतंत्र प्रैक्टिस की शुरुआत भी की जा सकती है।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया का हेड ऑफिस एवं मध्यप्रदेश में इसकी शाखाएँ जहाँ से इस कोर्स हेतु रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है, इस प्रकार हैं-
हेड ऑफिस
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, आईसीएआई भवन, इंद्रप्रस्थ मार्ग, नई दिल्ली।

मध्यप्रदेश में ब्राँच
द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, इंदौर ब्राँच -101, सिक्का स्कूल के पास स्कीम नं. 74, इंदौर।
    द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया, भोपाल ब्राँच-148, जोन-2, महाराणा प्रताप नगर, भोपाल।

बाजार की नब्ज पकडिय़े




अगर आप बाजार की नब्ज पकडऩा अच्छी तरह जानते हैं तो कैरियर में बेहतर सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आइये जानते हैं क्या- क्या है बाजार में।

मार्केट रिसर्च (बाजार अनुसंधान)एक प्रकार की मार्केटिंग तकनीक है जिसमें सर्वेक्षण, विश्लेषण और उपभोक्ताओं से बातचीत कर नए उत्पाद के बारे में अहम जानकारी प्राप्त की जाती है। मार्केट रिसर्च को हम इस प्रकार भी समझ सकते हैं कि कोई कंपनी अपना नया उत्पाद बाजार में लाने से पहले रणनीति बनाती है कि बाजार में उस उत्पाद की माँग कैसे उत्पन्न की जाए ? कंपनी इस बात पर भी गौर करती है कि उसके उत्पाद का उपभोक्ता वर्ग कौन होगा, महिला, पुरुष अथवा बच्चे। माना कि कोई कंपनी साबुन मार्केट में लाना चाहती है तो कंपनी बाजार विश्लेषण करती है कि वह फेस सोप होना चाहिए या बॉडी सोप। बाजार और उपभोक्ताओं से जुड़ी तमाम जानकारियाँ, उपभोक्ताओं की पसंद-नापसंद के बारे में जानकारी एकत्रित की जाती है। इसके बाद ही उत्पाद बाजार में उतारा जाता है।

नए प्रोडक्ट को पहचानिये
मार्केट रिसर्च के अंतर्गत किसी नए प्रोडक्ट या सर्विसेज को बाजार में फैलाने के लिए सबसे पहले विस्तृत आँकड़े या डाटा इक_ा करने की जरूरत पड़ती है जिसे अंजाम देते हैं मार्केट रिसर्चर। मार्केट रिसर्चर का कार्य यह निर्धारित करना होता है कि कोई भी नया प्रोडक्ट या सर्विस बाजार में किस प्रकार खपेगा, इसका खरीददार कौन होगा। ये न सिर्फ नए प्रोडक्ट और सर्विसेज पर काम करते हैं बल्कि बाजार की रणनीतियों पर भी काम करते हैं। ये सर्वेक्षण, वैचारिक मत, सवाल-जवाब से एकत्रित हुए डाटा को डिजाइन करने के लिए सांख्यिकीय तकनीकें अपनाते हैं।

उपभोक्त की पसंद
मार्केट रिसर्चर उपभोक्ता की पसंद, खरीददारी की आदत, बाजार में उस प्रोडक्ट की कीमत और बिक्री के आधार पर डाटा एकत्रित कर उसका विश्लेषणात्मक अध्ययन करते हैं। इसके लिए उन्हें रिपोर्ट, ग्राफिक इलस्ट्रेशन जैसे टेबल, चार्ट्स आदि तैयार करने पड़ते हैं ताकि उसे प्रजेंटेशन के जरिए समझाया जा सके। इसके अलावा मार्केट रिसर्चर इस बात पर भी नजर रखता है कि कौनसे क्षेत्र में प्रोडक्ट की माँग अधिक है और उपभोक्ताओं की प्रोडक्ट के प्रति अपेक्षाएँ क्या हैं ?
मार्केट रिसर्च में तीन प्रमुख क्षेत्र सम्मिलित हैं, जो इस प्रकार हैं- 1. रिसर्च, 2. फील्ड वर्क तथा 3. डाटा विश्लेषण।

रिसर्च
इस विभाग का काम बाजार से जुड़ी समस्याओं का पता लगाना और डाटा को इक_ा करना होता है। साथ ही यह भी पता लगाना कि कितने लोग प्रोडक्ट का इस्तेमाल कर रहे हैं। रिसर्च रिपोर्ट्स और प्रस्ताव बनाने का काम भी इसी विभाग के अंतर्गत आता है।

फील्ड वर्क
फील्ड वर्क के तहत फोन, मेल के जरिए अथवा घर-घर जाकर, मार्केट सर्वेक्षण किया जाता है।

डाटा विश्लेषण
डाटा विश्लेषण के तहत इक_ा की गई सामग्री का विश्लेषण कर परिणाम तक पहुँचा जाता है।

कीजिए विश्लेषण
यदि आपमें विश्लेषण करने की क्षमता, सांख्यिकीय योग्यता, दबाव में काम करने की क्षमता, आत्मविश्वास, क्लाइंट्स से बात करने में सहनशीलता, समय प्रबंधन, आर्थिक और कला की परख हो तो इस क्षेत्र में आपके लिए दरवाजे खुले हैं। मार्केट रिसर्च के क्षेत्र में करियर बनाने हेतु जो शैक्षणिक योग्यता आवश्यक है वह इस प्रकार है- जो बतौर रिसर्च एक्जीँयूटिव काम करना चाहते हैं उन्हें मार्केटिंग में एमबीए होना जरूरी है। इसके अलावा सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी या एन्थ्रोपोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट युवाओं हेतु भी इस क्षेत्र में उजले अवसर हैं। वे युवा जो फील्ड वर्क करना चाहते हैं उनके पास सांख्यिकी, भूगोल, अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान या कम्प्यूटर साइंस में डिग्री के साथ ही अच्छी कम्युनिकेशन स्किल भी होनी चाहिए।

रोजगार के अवसर
इस क्षेत्र में रोजगार की बात की जाए तो कंपनियों, शिक्षण संस्थानों, यहाँ तक कि सरकार को भी मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है, इसलिए इस क्षेत्र में उजली संभावनाएँ हैं। मल्टीनेशनल और मार्केटिंग संगठन, सरकारी विभाग और रिसर्च इंस्टीट्यूशन इन-हाउस मार्केट रिसर्च ऑपरेशन का काम करते हैं जिसके लिए मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है। सरकारी विभागों को भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर लोगों की राय जानने हेतु मार्केट रिसर्चर की जरूरत पड़ती है। इसे देखते हुए इस क्षेत्र में अवसरों की कोई कमी नहीं है।

प्रमुख संस्थान

 डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा।
टाइम्स स्कूल ऑफ मार्केटिंग, नई दिल्ली।
नरसी मोन्जी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज,विले पार्ले, मुंबई।
मुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ कम्युनिकेशन, अहमदाबाद।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन,जेएनयू कैम्पस, नई दिल्ली।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सेल्स, नई दिल्ली।